अपनी रक्षा के लिए
गोरखनाथ जी का शाबर मंत्र.
मंत्र इस प्रकार है-
ओम गुरुजी भभूत माता भभूत पिता भभूत पीर उस्ताद भभूति में लिपटे शंकर शंभू काशी के कोतवाल नवनाथों ने भभूत रमाई प्रकटी उसमें काली माई रिद्धि लाई सिद्धि लाई कॉल कंटक को मार भगाई अस्तक मस्तक लिंग आकार मस्तक भभूत जय जय कार भभूति में त्रिदेव विराजे बजरंगी नाचे गोरख गाजे खोलें भाग्य के बंद दरवाजे ।सिद्धो आदेश धूना लगाया। उपजी भभूति मन हर्षाया। भभूति भष्म का जपो जाप उतरे जन्म जन्म के पाप आदेश गुरुजी नाथ जी को आदेश भटनेर काली को आदेश।
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